India News 24×7 Online

श्रेणी : सम्पादकीय

अल्मोड़ा सम्पादकीय

गोल्फ ग्राउन्ड फिर से खोलो चैलेन्ज । क्या रानीखेत में किसी में है दम जो इस चैलेन्ज को ले सके?

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पिछले दिनों सोशल मीडिया पर पहाड़ी टोपी चैलेन्ज, कुमाँऊनी नथ चैलेन्ज आदि की धूम रही। लेकिन रानीखेत में एक ऐसा चैलेन्ज है। जिसे स्वीकार करने...
अल्मोड़ा उत्तराखण्ड सम्पादकीय

रानीखेत की शान गोल्फ ग्राउंड में सेना ने पूरे मैदान में की तार-बाड़, पर्यटकों के लिए हुआ बंद, जनता में आक्रोश। भाजपा कांग्रेस रानीखेत के विनाश पर हमेशा कि तरह साध रहे है मौन?

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सम्पादकीय : रानीखेत में पर्यटन ही एक मात्र ऐसा क्षेत्र है जहाँ इस मरते हुए शहर के लिए थोड़ी बहुत सम्भावनाये बची हुयी है। लेकिन...
सम्पादकीय

रोटी की जुगत : एक प्रवासी बेरोजगार युवक की हकीकत से रूबरू कराती कहानी, जो हमारे आस पास किसी ना किसी के साथ बीती है। यमकेश्वर ब्लॉक के युवा पत्रकार हरीश कंडवाल (मनखी) की कलम से आप तक

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रोटी की जुगत दिल को हिला देने वाली हकीकत से रूबरू कराती ये रिपोर्ट, यमकेश्वर ब्लॉक के युवा पत्रकार हरीश कंडवाल (मनखी) की कलम से...
सम्पादकीय

बम्पर ऑफर : Go Digital with Ranikhet News ! रानीखेत न्यूज़ के साथ अपने राजनैतिक कैरियर / व्यवसाय को दीजिये नयी ऊचाइयां। 

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रानीखेत न्यूज़ के वर्तमान में 22 हजार फॉलोवर्स हैं तथा रानीखेत न्यूज़ प्रत्येक माह 15 लाख से अधिक लोगों तक अपनी पहुंच बनाता है। साथ...
राष्ट्रीय सम्पादकीय

एक लेख किसान खेत और उसके बैलों के बारे में पढ़िए। वो किसान जिन्हे हम अशिक्षित कहते है, वो किस तरह अपनी मिटटी से जुड़े होते है।

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खेतों में हल खींचते समय यदि कोई बैल गोबर या मूत्र करने की स्थिति में होता था तो किसान कुछ देर के लिए हल चलाना...
सम्पादकीय

उत्तराखंड में गर्भवती बेटियों का काल बने अस्पताल लेकिन उत्तराखंड के लोग कब तक भाजपा कांग्रेस के ख़रीदे हुए गुलाम बनकर अपने प्रियजनों की बलि इनके वोटों के लिए देते रहेंगे।

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स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव के चलते उत्तराखंड में बहू, बेटियों की मौत का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। एक नज़र डालते है...
सम्पादकीय

मुसीबत में फँसे लोग सोशल मीडिया पर लोग कोस रहे सरकार को। जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा … चुनावों के समय वोट के लिए फोन कर-कर लोगों को उत्तराखण्ड बुलाने और पूरा खर्चा तक दे देने वाले उत्तराखण्ड के नेताओं ने आज मुसीबत में लोगों को भूखे मरने के लिए छोड़ दिया है। साहब, जो इन्सान बिना पैसों के, बिना रोजगार के परदेस में फँसा हो उसका दर्द केवल वो ही समझ सकता है।

मुसीबत में फँसे लोग सोशल मीडिया पर लोग कोस रहे सरकार को। जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा … चुनावों के समय वोट के लिए...