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अल्मोड़ा उत्तराखण्ड सम्पादकीय

रानीखेत की शान गोल्फ ग्राउंड में सेना ने पूरे मैदान में की तार-बाड़, पर्यटकों के लिए हुआ बंद, जनता में आक्रोश। भाजपा कांग्रेस रानीखेत के विनाश पर हमेशा कि तरह साध रहे है मौन?

सम्पादकीय : रानीखेत में पर्यटन ही एक मात्र ऐसा क्षेत्र है जहाँ इस मरते हुए शहर के लिए थोड़ी बहुत सम्भावनाये बची हुयी है। लेकिन वर्तमान में जिस तरह से रानीखेत को विनाश के रास्ते पर ले जाने के लिए कोशिशे की जा रही है। उस हिसाब से बहुत जल्द ही ये शहर अपना अस्तित्व ही शायद हमेशा के लिए खो देगा।

रानीखेत के विश्व प्रसिद्ध गोल्फ ग्राउंड के बिना रानीखेत में पर्यटन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। शायद ही ऐसा कोई पर्यटक या स्थानीय निवासी होगा जिसने गोल्फ ग्राउंड की सुंदरता का आनद ना लिया हो। लेकिन अब एक बार फिर से सेना द्वारा पूरे गोल्फ ग्राउंड में तार बाड़ कर ग्राउंड को स्थानीय नागरिको और पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है।

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जनजागरण मंच के अध्यक्ष खजान जोशी ने कहा है की रविवार और अन्य अवकाश के दिनों में स्थानीय लोग पिकनिक मनाने गोल्फ ग्राउंड जाते थे। वही ये ग्राउंड पर्यटकों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र है। खजान जोशी ने कहा है कि रानीखेत के विधायक करन माहरा ने जिलाधिकारी से वार्ता का आश्वासन दिया है वही सांसद अजय टम्टा ने भी कार्यवाही का भरोसा दिलाया है। लेकिन अगर गोल्फ ग्राउंड को आम जनता के लिए नहीं खोला गया तो जनजागरण मंच इस मुद्दे पर आंदोलन को बाध्य होंगे।

बहरहाल एक बड़ा सवाल ये है कि सेना द्वारा आये दिन इसी प्रकार से ग्राउंड को बंद कर दिया जाता है तो कभी रानीखेत अल्मोड़ा मार्ग को, तो कभी रानीखेत चौबटिया मार्ग को सेना द्वारा बंद कर दिया जाता है। जबकि सेना का गठन आम जनता के टैक्स के पैसे से आम जनता के लिए ही किया गया है। लेकिन सेना के अफसर अपना तानाशाही रवैया दिखा कर केवल आम जनता को ही परेशन करते है साथ ही सेना कि छवि भी ख़राब करते है।

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वही दूसरी तरफ रानीखेत के आम नागरिक भाजपा कांग्रेस में इस तरह बंट चुके है कि उन्हें अपने घर और शहर कि बर्बादी भी नहीं दिखाई देती है। जहा रानीखेत के चारो तरह हर शहर में विकास कि बयार बह रही है वही रानीखेत दिन प्रतिदिन विनाश के अंधे कुवें में गोता लगाने को तत्पर है। जिस राजनितिक दल के प्रतिनिधियों से बात करों उनके पास केवल एक ही उत्तर होता है कि दूसरे दल कि सरकार थी तो उसने क्या किया?

क्या कभी रानीखेत वासी अपने शहर को बचाने के लिए जाग पाएंगे? या यूं ही ये शहर एक दिन अतीत के पन्नो में शामिल हो जायेगा ?

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